कक्षा १२वी के पठ एक के नोट्स
१ निर्वाह के तरीके ;
१.१ कृषि ; गेंहू ,जौ सफेद चना ,तिल, बाजरा, चावल अदि फशल उगाई जाती थी
१.२ पशुपालन ; जानवरो की हड्डियों से पशुपालन के अवशेस मिलते हे भेड़, बकरी, भेंस, शुअर अदि जावेर पाले जाते थे
२ कृषि औद्योगिकी ;
२.१ हल का प्रचलन ; हड्डपाई मोहर से बेल का चित्र मिला है इससे पता चलता है की हड्डपा सभ्यता में बलों का उपयोग कृषि के लिए किया जाता था
चोलिस्तान, बलवली अदि से हल के प्रतिरूप मिले है एक साथ दो फसले उगाई जाती थी कालीबंगन में जुटे हुए कहे के प्रमाण मिले है
२.२ नहर ; अफगानिस्तान में सोतुरघई से नहर और धोलावीरा से जलाशय के प्रमाण मिले है कुआँ व नदी का उपयोग सिचाई के लिए किया जाता था
३ मोहनजोदड़ो ; यह एक नियोजित शहरी केंद्र था बस्ती दो भागों में विभाजित थाई दुर्ग और निचला शहर
३.२ दुर्ग ; दुर्ग कच्ची ईंटो से बना इक चबूतरा था इसकी संरचना छोटी थी यह चारो और से दीवार से घिरा हुआ था दुर्ग पर बनी शंरचना का उपयोग विशिस्ट कार्यो के लिए किया जाता था दुर्ग में एक मालगोदाम था और एक विशाल स्नानागार था जो चारो और से गलियारे से घिरा हुआ था स्नानागार में जाने के लिए शिडिया बनाई है थीं
३.२ निचला शहर ; यह आवासीय भवन थे यह दुर्ग से बड़े आकर का था यह चरो और से दीवार से घिरा हुआ था इसे दुर्ग से अलग बताया गया था
३.३ जल निकास प्रणाली ; यह नियोजित जल निकष प्रणाली थी इसमें पहले नालो का निर्माण किया गया उसके बाद घर बनाये गए सभी छोटी नालिया बड़े नाले से जुड़ी होती थी नालियों का पानी बड़े नाले में जाकर शहर से बाहर चला जाता था नालियों के ऊपर ढक्क्न लगाए जाते थे जिससे नाली को साफ किया जा सके यज ग्रिड पद्धति में बनाई गई नालिया थी
३.४ ग्रह स्थापत्य कला ; हड़प्पा सभ्यता में लोग एकांतात को महत्व देते थे घरो में खिड़किया नहीं होती थी आंगन के चारो और कमरे बने होते थे सभी के अपने - अपने स्नानघर होते थे यत्रिओ द्वारा कुए भी बनवाये गए थे हड़प्पा सभ्यता से ७०० कुए के अवशेस मिले है
४ सामाजिक भिंताओ का अवलोकन ; किसी भी सभ्यता के सामाजिक भिंताओ का अवलोकन निम्न तरीको से किया जाता है
४.१ सवाधान ; हड़प्पा सभ्यता में व्यक्ति को दफनाकर अंतिम संस्कार किया जाता था सभी कब्रों की बनावट एक दूसरे से अलग होती थी कब्रों के सांथ आभुषण और बर्तन दफनाए जाते थे हड़प्पा सभ्यता के लोग पुनर जन्म में विश्वाश करते थे इनका विश्वाश बहुमूल्य चीजे दफनाने में नहीं था
५ शिल्प उत्पादन ; चन्हूड़ो एक छोटी बस्ती थी जो पूरी तरह शिल्प उत्पादन में सलग्न थी शिल्प उत्पादन में मनके बनाना शंख की कटाई , मुहर निर्माण करना आदि कार्य सम्मिलित थे कार्निलियन , जैसफर , शंख , सेलखड़ी , सोना, चंडी , ताँबा , कांशा आदि के मनके बनाये जाते थे
६ एक रहस्मय लिपि ; हड़प्पाई मोहर में कुछ लिखा होता था जो मालिक का नाम व पदवी को दर्शाता था मुद्रा पैर बने चित्र अनपढ़ लोगो को उसका अर्थ समझते थे सबसे लंबे अभिलेख में २६ अक्छर मिले है यह लिपि पढ़ी नहीं जा स्की है इस लिपि में लगभग ४०० चिन्ह है
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